यह अभियान क्यों शुरू हुआ?

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यह एक पत्र नहीं — एक सार्वजनिक घोषणा है।

📜 भारत के नागरिकों के नाम,

यह पत्र किसी को बुलाने के लिए नहीं लिखा गया है,
और न ही किसी को समझाने के लिए।

यह पत्र उन लोगों के लिए है —
जिन्होंने बहुत कुछ सहा है…
लेकिन अब भी हार नहीं मानी।

हम ऐसे समय में जी रहे हैं
जहाँ मेहनत करने वाले बहुत हैं,
पर सही दिशा बहुत कम है।

जहाँ इच्छाएं हैं — पर साथ नहीं।
जहाँ लोग हैं — पर व्यवस्था नहीं।

अक्सर सुनने को मिलता है —
“कुछ करना चाहिए…”
लेकिन कैसे?
यह कोई नहीं बताता।

सच यह है —

इंसान कमजोर नहीं होता,
वह अकेला हो जाता है।

और जब इंसान अकेला हो जाता है,
तो उसकी मेहनत भी धीरे-धीरे टूटने लगती है।

इसी अकेलेपन को समाप्त करने का एक प्रयास है —
रोज़गार सहयोग अभियान

यह कोई योजना नहीं है।
यह कोई वादा नहीं करता।

यह केवल एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने का प्रयास है —
जहाँ व्यक्ति को अकेले खड़ा न रहना पड़े।

जहाँ भाषण नहीं हैं,
सहानुभूति नहीं है,
और झूठी तसल्ली भी नहीं।

“आप अकेले नहीं हैं… लेकिन यहाँ आपको स्वयं खड़ा रहना होगा।”

यदि आपके भीतर अभी भी कोई प्रश्न उठता है,
तो बस एक प्रश्न रहने दीजिए —

अगर कोई अकेला न रहे…
तो क्या बदल सकता है?

यह पत्र जानकारी देने के लिए नहीं,
एक सोच जगाने के लिए लिखा गया है।

निर्णय दिल से समझिए —
और अपनी समझ से फैसला लीजिए।

— ओमकृत सहयोगम फाउंडेशन

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